Carbon Justice Award 2026

Carbon Justice Award 2026

देहरादून , 8 अक्टूबर। हिमालय और हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के हित में उल्लेखनीय योगदान को सम्मानित करने के लिए ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी और एप्रोप्रिएट टेक्नोलॉजी इंडिया (एटीआई) ने कार्बन जस्टिस अवॉर्ड की शुरुआत की है। प्रसिद्ध लेखक रस्किन बॉन्ड को पहला कार्बन जस्टिस अवॉर्ड दिया जाएगा।

कार्बन जस्टिस अवॉर्ड हिमालय की प्रकृति, पर्यावरण और वहां रहने वाले लोगों के संरक्षण व कल्याण के लिए समर्पित प्रयासों को प्रोत्साहित करने की एक विशेष पहल है। यह अवॉर्ड उन व्यक्तियों, संस्थानों और सामुदायिक पहलों को प्रोत्साहन और प्रतिष्ठा प्रदान करेगा जो अपने कार्यों के माध्यम से हिमालय को अधिक सतत, सुरक्षित और न्यायपूर्ण भविष्य की ओर ले जाने में योगदान दे रहे हैं। इस अवॉर्ड के माध्यम से शोध, शिक्षा, संरक्षण, टेक्नोलॉजी, सामुदायिक विकास, जन-जागरूकता, साहित्य और सामाजिक कार्य जैसे विभिन्न क्षेत्रों में किए गए उल्लेखनीय प्रयासों को सम्मानित किया जाएगा।

पहले कार्बन जस्टिस अवॉर्ड से प्रसिद्ध लेखक रस्किन बॉन्ड नवाजे जाएंगे। कहानी, उपन्यास, कविता और बाल साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले रस्किन बॉन्ड का हिमालय और प्रकृति से गहरा साहित्यिक जुड़ाव रहा है। ग्राफिक एरा ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डा. कमल घनशाला ने इस पुरस्कार की घोषणा करते हुए कहा कि रस्किन बॉन्ड ने अपनी रचनाओं के माध्यम से हिमालय के पहाड़ों, जंगलों, नदियों, घाटियों और जनजीवन को जिस आत्मीयता से प्रस्तुत किया है, वह पाठकों की कई पीढ़ियों को प्रकृति और हिमालय के करीब लाने वाली रही है। उनके साहित्य ने हिमालय की प्राकृतिक विरासत के प्रति संवेदना और उसे सहेजने की भावना को भी निरंतर मजबूत किया है। इसी आजीवन साहित्यिक सरोकार और हिमालय के प्रति गहरे जुड़ाव के लिए उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया जाएगा।

ग्राफिक एरा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डा. कमल घनशाला ने कहा कि हिमालय के सतत् विकास और यहां के लोगों के कल्याण के प्रति ग्राफिक एरा की प्रतिबद्धता इस पहल की मूल भावना है। शिक्षा, विज्ञान, टेक्नोलॉजी, शोध और इनोवेशन को केवल ज्ञान तक सीमित न रखते हुए समाज और प्रकृति के हित में उपयोग करने की सोच के साथ ग्राफिक एरा उत्तराखंड और हिमालय के विकास से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर योगदान दे रहा है। डा. घनशाला ने कहा कि हिमालय की प्रगति केवल आर्थिक या तकनीकी विकास तक सीमित नहीं हो सकती। इसके लिए यहां के लोगों के कल्याण के साथ पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है। शिक्षा, इनोवेशन और सतत विकास को हिमालय के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत आधारशिला बनाना जरूरी है। हिमालय की सेवा उनके लिए केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि इस क्षेत्र की प्रकृति, समाज और आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य के प्रति आजीवन संकल्प है। उन्होंने कहा कि इसी सोच के साथ कार्बन जस्टिस अवॉर्ड की शुरुआत की गई है, ताकि हिमालय के संरक्षण और यहां के लोगों के बेहतर एवं न्यायपूर्ण भविष्य के लिए किए जा रहे उल्लेखनीय प्रयासों को पहचान और प्रोत्साहन मिल सके।

एप्रोप्रिएट टेक्नोलॉजी इंडिया (एटीआई) का पर्यावरण, उपयुक्त टेक्नोलॉजी और पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के साथ लंबे समय से किया जा रहा कार्य भी इस पहल की दिशा और उद्देश्य को सार्थक आधार देता है। ग्राफिक एरा के सेंटर फॉर हिमालयन स्टडीज के चेयर प्रोफेसर प्रो. एस. पी. सिंह का हिमालयी पारिस्थितिकी और संरक्षण के क्षेत्र में दीर्घकालिक शोध एवं योगदान इस पहल की महत्वपूर्ण प्रेरणा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *