Rajaji Reserve Wildlife Corridor

Rajaji Reserve Wildlife Corridor

  • लगभग 20 किलोमीटर लंबी यह परियोजना ₹743 करोड़ की अनुमानित लागत से हाइब्रिड एन्युटी मोड के तहत बनाई जा रही है
  • इस परियोजना के लिए निर्धारित 60 मीटर राइट ऑफ वे (ROW) को घटाकर केवल 23 मीटर रखा गया है
  • परियोजना के अंतर्गत 1 प्रमुख ब्रिज-कम-एलीफेंट अंडरपास, 4 समर्पित एलीफेंट अंडरपास, ग्रीन गाइड हेज, साउंड बैरियर,एंटी-ग्लेयर स्क्रीन जैसे कई प्रावधान किये गए हैं*

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) उत्तराखंड में भानियावाला–जॉलीग्रांट–ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना (एनएच-07) को सुरक्षित, तेज़ और पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी राजमार्ग के रूप में विकसित कर रहा है। लगभग 20 किलोमीटर लंबी यह परियोजना ₹743 करोड़ की अनुमानित लागत से हाइब्रिड एन्युटी मोड के तहत बनाई जा रही है। इसके माध्यम से देहरादून, जॉलीग्रांट एयरपोर्ट और ऋषिकेश के बीच संपर्क और अधिक सुदृढ़ होगा, साथ ही पर्यटन, चारधाम यात्रा तथा राज्य की बढ़ती परिवहन आवश्यकताओं को बेहतर आधार मिलेगा।

परियोजना की आवश्यकता क्यों है
वन क्षेत्र से गुजरने वाले मौजूदा दो-लेन मार्ग पर प्रतिदिन लगभग 18,456 वाहनों का आवागमन हो रहा है, जो लगभग 15,088 पैसेंजर कार यूनिट (PCU) है। पर्यटन, जॉलीग्रांट एयरपोर्ट की बढ़ती आवाजाही तथा चारधाम यात्रा के कारण भविष्य में यातायात और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में इस मार्ग का चौड़ीकरण आवश्यक हो गया है।

मौजूदा दो-लेन राजमार्ग पर कई स्थानों पर तीखे मोड़ हैं तथा यह घने वन क्षेत्र से होकर गुजरता है। इसके अलावा बसों, ट्रकों और अन्य भारी वाणिज्यिक वाहनों की लगातार आवाजाही के कारण यातायात दबाव बढ़ रहा है, जिससे जाम और सड़क दुर्घटनाओं की संभावना बनी रहती है। फोर लेन निर्माण से सड़क की ज्यामिति में सुधार होगा, यात्रा अधिक सुरक्षित होगी तथा स्थानीय लोगों और पर्यटकों दोनों को आधुनिक सड़क सुरक्षा सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

वन संरक्षण के लिए विशेष प्रयास
पर्यावरण पर प्रभाव को न्यूनतम रखने के उद्देश्य से एनएचएआई ने परियोजना के डिजाइन में कई महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग संशोधन किए हैं। सामान्यतः राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए 60 मीटर राइट ऑफ वे (ROW) निर्धारित होता है, लेकिन वन क्षेत्र में इसे घटाकर केवल 23 मीटर रखा गया है। इससे राजमार्ग की सुरक्षा संबंधी मानकों से समझौता किए बिना पेड़ों की कटाई को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
इसके अतिरिक्त, फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (FRI) द्वारा किए गए वैज्ञानिक आकलन के आधार पर 754 पेड़ों को प्रतिरोपण (ट्रांसप्लांटेशन) के लिए उपयुक्त चिन्हित किया गया है। इनका प्रतिरोपण आगामी मानसून के दौरान किया जाएगा।

परियोजना के केंद्र में वन्यजीव संरक्षण
यह परियोजना बड़कोट, ऋषिकेश और थानो वन रेंज जैसे पारिस्थितिक दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों से होकर गुजरती है, इसलिए एनएचएआई ने दिल्ली–देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर की तर्ज पर इसमें भी वन्यजीव संरक्षण को विशेष महत्व दिया है।

उत्तराखंड वन विभाग, WWF-India तथा भारतीय वन्यजीव संस्थान (WWI), देहरादून के तकनीकी परामर्श के आधार पर परियोजना में निम्नलिखित प्रावधान किए गए हैं:—

  • 1 प्रमुख ब्रिज-कम-एलीफेंट अंडरपास
  • 4 समर्पित एलीफेंट अंडरपास
  • ग्रीन गाइड हेज
  • साउंड बैरियर
  • एंटी-ग्लेयर स्क्रीन
  • वन्यजीव चेतावनी संकेतक
  • गति नियंत्रण (स्पीड कैल्मिंग) उपाय
  • निर्धारित ‘नो हॉर्न’ जोन

इन सभी उपायों को इस उद्देश्य से परियोजना में शामिल किया गया है कि वन्यजीवों की प्राकृतिक आवाजाही बनी रहे और मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावना कम हो।

वन्यजीव शमन (Wildlife Mitigation) क्यों आवश्यक है
वन विभाग के अभिलेखों के अनुसार, मौजूदे दो-लेन मार्ग पर ऋषिकेश और बड़कोट वन रेंज के अंतर्गत पिछले पांच वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं में 29 वन्यजीवों की मृत्यु दर्ज की गई है।

इसी को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित राजमार्ग में हाथियों के सुरक्षित आवागमन के लिए लगभग 3.5 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड संरचना सहित विशेष एलीफेंट अंडरपास विकसित किए जा रहे हैं। इससे वन्यजीवों की आवाजाही अधिक सुरक्षित होगी और इस व्यस्त मार्ग पर वन्यजीव दुर्घटनाओं में कमी लाने में मदद मिलेगी।

वैधानिक एवं नियामकीय अनुमतियों के अनुरूप परियोजना
यह परियोजना सभी आवश्यक वैधानिक अनुमतियां प्राप्त होने के बाद शुरू की गई है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने WP (PIL) संख्या 37/2025 की सुनवाई के दौरान बाद में यह स्पष्ट किया कि पेड़ों की कटाई पर कोई प्रभावी रोक (Continuing Stay) लागू नहीं है।

इसके उपरांत राज्य सरकार ने निर्धारित पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों एवं वैधानिक शर्तों के अधीन पेड़ों की कटाई एवं प्रतिरोपण के लिए आवश्यक वर्किंग परमिशन प्रदान की है। तदनुसार, एनएचएआई सभी सक्षम प्राधिकारियों से आवश्यक अनुमतियां प्राप्त करने के बाद तथा सभी लागू कानूनी एवं पर्यावरणीय प्रावधानों का पूर्ण अनुपालन करते हुए परियोजना का कार्य कर रहा है।

उत्तराखंड को मिलने वाले प्रमुख लाभ परियोजना पूर्ण होने के बाद

  • देहरादून, जॉलीग्रांट एयरपोर्ट और ऋषिकेश के बीच संपर्क बेहतर होगा।
  • चारधाम यात्रियों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए यात्रा अधिक सुगम होगी।
  • यात्रा समय तथा यातायात जाम में कमी आएगी।
  • बेहतर सड़क ज्यामिति एवं चौड़े कैरिजवे से सड़क सुरक्षा में सुधार होगा।
  • भविष्य में अन्य राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं से उत्पन्न होने वाले अतिरिक्त यातायात का सुचारु संचालन संभव होगा।
  • समर्पित एलीफेंट अंडरपास के माध्यम से वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित होगी।
  • वैज्ञानिक योजना और वृक्ष प्रतिरोपण के माध्यम से आधारभूत ढांचे के विकास तथा पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित होगा।

भविष्य के लिए तैयार एक राजमार्ग
भानियावाला–जॉलीग्रांट–ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना बढ़ती यातायात आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ उत्तराखंड के वन एवं वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति NHAI की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। आधुनिक इंजीनियरिंग, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और सभी वैधानिक प्रावधानों के अनुपालन के साथ यह परियोजना इस बात का उदाहरण है कि सतत आधारभूत ढांचा विकास और पारिस्थितिक संरक्षण एक साथ आगे बढ़ सकते हैं।

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