Guru Seva and Blood Donation

Guru Seva and Blood Donation

  • संगतों ने रक्तदान कर निभाई सेवा कीसंगतों ने रक्तदान कर निभाई सेवा की परंपरा, 101 यूनिट रक्त संग्रहित परंपरा, 101 यूनिट रक्त संग्रहित
  • परमपूज्य ब्रह्मलीन श्रीमहंत इन्दिरेश चरण दास जी महाराज के महानिर्वाण दिवस पर उमड़ा श्रद्धा का सागर
  • संगतों ने रक्तदान कर निभाई सेवा की परंपरा, 101 यूनिट रक्त संग्रहितसंगतों ने रक्तदान कर निभाई सेवा की परंपरा, 101 यूनिट रक्त संग्रहित

देहरादून। परमपूज्य ब्रह्मलीन श्रीमहंत इन्दिरेश चरण दास जी महाराज के महानिर्वाण दिवस (10 जून) के पावन अवसर पर श्री दरबार साहिब में श्रद्धा, भक्ति और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्री दरबार साहिब के पूजनीय सज्जादे गद्दी नशीन श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज ने श्री झण्डे जी पर विशेष पूजा-अर्चना कर समस्त मानव जाति के कल्याण, सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की और अपने गुरु परमपूज्य ब्रह्मलीन श्रीमहंत इन्दिरेश चरण दास जी महाराज को याद किया। देश-विदेश से पहुंची हजारों संगतों ने अपने पूज्य गुरु महाराज को याद करते हुए श्री दरबार साहिब में मत्था टेका तथा उनके बताए सेवा, समर्पण और मानवता के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। इस अवसर पर श्री दरबार साहिब परिसर में लंगर, प्रसाद एवम् शबील वितरित की गई।

महानिर्वाण दिवस को सेवा दिवस के रूप में मनाते हुए श्री दरबार साहिब परिसर में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। 101 यूनिट रक्तदान हुआ। संगतों ने अपने पूज्य गुरु महाराज की स्मृति में उत्साहपूर्वक रक्तदान कर मानव सेवा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। शिविर में कुल 101 यूनिट रक्तदान हुआ। श्रद्धालुओं का मानना था कि रक्तदान महादान है और जरूरतमंदों के जीवन की रक्षा करना ही सच्ची गुरु सेवा है।

इस अवसर पर पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड सहित देश-विदेश से पहुंची संगतों ने श्री गुरु महाराज के श्रीचरणों में श्रद्धासुमन अर्पित किए।

महानिर्वाण दिवस केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि गुरु की शिक्षाओं को आत्मसात करने का पर्व है। परमपूज्य ब्रह्मलीन श्रीमहंत इन्दिरेश चरण दास जी महाराज ने अपने जीवन में सेवा, परोपकार, प्रेम और मानवता का जो संदेश दिया, उसी प्रेरणा से संगतों ने इस दिन को सेवा, श्रद्धा और जनकल्याण के संकल्प के साथ मनाया। पूरे वातावरण में गुरु भक्ति, सेवा भावना और आध्यात्मिक उल्लास का दिव्य भाव व्याप्त रहा।

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