Humanity
देहरादून। वर्दी के साथ मानवता का फर्ज निभाते हुए दून पुलिस ने एक बार फिर संवेदनशीलता की मिसाल पेश की। कोतवाली डोईवाला पुलिस ने लावारिस मिले एक व्यक्ति की मृत्यु के बाद परिजनों का पता नहीं चलने पर पूरे हिंदू रीति-रिवाज और विधि-विधान के साथ उसका अंतिम संस्कार कराया। पुलिस ने मृतक का डीएनए सैंपल भी सुरक्षित रखा है, ताकि भविष्य में परिजनों की पहचान होने पर आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
पुलिस के अनुसार, 22 जुलाई 2026 को करीब 55 वर्षीय व्यक्ति प्यारे लाल लक्ष्मण सिद्ध मंदिर क्षेत्र में बीमार अवस्था में घूमता हुआ मिला था। पूछताछ में वह केवल अपना नाम बता पा रहा था और अपने पते अथवा परिजनों के संबंध में कोई जानकारी नहीं दे पा रहा था। उसकी गंभीर हालत को देखते हुए पुलिस ने 108 एंबुलेंस की मदद से उसे उपचार के लिए जिला अस्पताल कोरोनेशन भेजा।
4 सितंबर 2026 को जिला अस्पताल कोरोनेशन से पुलिस को डेथ मेमो के माध्यम से प्यारे लाल की मृत्यु की सूचना मिली। मृतक के पते और परिजनों की कोई जानकारी उपलब्ध नहीं होने के कारण शव को शिनाख्त के लिए 72 घंटे तक अस्पताल की मोर्चरी में सुरक्षित रखा गया। इस दौरान पुलिस ने शव की पहचान कराने के लिए विभिन्न माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार किया और हरसंभव प्रयास किए, लेकिन निर्धारित अवधि में भी मृतक की शिनाख्त नहीं हो सकी।
इसके बाद पुलिस ने नियमानुसार पंचायतनामा की कार्रवाई पूरी की। शव के क्षतिग्रस्त होने की स्थिति को देखते हुए निर्धारित समयावधि पूरी होने के बाद 8 सितंबर 2026 को डोईवाला पुलिस टीम ने मृतक के हिंदू धर्म से संबंधित होने के आधार पर लक्खीबाग श्मशान घाट में पूरे हिंदू रीति-रिवाज एवं विधि-विधान के साथ उसका अंतिम संस्कार किया।
पुलिस ने बताया कि अज्ञात मृतक के परिजनों की तलाश अभी भी जारी है। भविष्य में पहचान सुनिश्चित करने के लिए मृतक का डीएनए सैंपल सुरक्षित रखा गया है। दून पुलिस की इस पहल ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी के साथ पुलिस जरूरतमंद और बेसहारा लोगों के प्रति मानवीय दायित्व निभाने से भी पीछे नहीं हटती।
पुलिस टीम:
कानि. सुपर दास
होमगार्ड चंद्र लाल
