anti-labour policies

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देहरादून। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर उत्तराखंड में संयुक्त ट्रेड यूनियंस संघर्ष समिति और स्वतंत्र फेडरेशनों द्वारा आयोजित हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। गांधी पार्क में हुए इस व्यापक श्रमिक प्रदर्शन में सीटू, इंटक, एटक, बैंक, बीमा, आशा, आंगनवाड़ी, भोजन माता, बिजली, संविदा, ठेका कर्मचारी, और बस्ती बचाओ आंदोलन सहित कई संगठनों ने भागीदारी की।

सभा को संबोधित करते हुए इंटक के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट ने केंद्र की मोदी सरकार पर श्रम विरोधी नीतियों का आरोप लगाते हुए चारों श्रम संहिताएं वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि इन नीतियों से मजदूरों का शोषण और बढ़ेगा।

सीटू के प्रांतीय अध्यक्ष राजेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि मोदी और धामी सरकार की नीतियों से मजदूर वर्ग गुलामी की ओर धकेला जा रहा है, जिसे देश का श्रमिक वर्ग कभी स्वीकार नहीं करेगा।

सीटू के प्रदेश सचिव लेखराज ने कहा कि 2020 की महामारी के दौरान संसद में विपक्षी सांसदों को निलंबित कर 29 श्रम कानूनों को खत्म किया गया और मालिकों के पक्ष में श्रम संहिताएं लाई गईं, जो न्यूनतम वेतन, सुरक्षा और अधिकारों की अनदेखी करती हैं।

युवा इंटक के प्रदेश अध्यक्ष पंकज क्षेत्री ने कहा कि धामी सरकार द्वारा काम के घंटे बढ़ाने का निर्णय उसके मजदूर विरोधी रवैये को उजागर करता है।

एटक के प्रदेश महामंत्री अशोक शर्मा ने इस देशव्यापी हड़ताल को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि आशा, आंगनवाड़ी, भोजन माता, संविदा और ठेका मजदूरों के साथ-साथ डाकपत्थर, विकासनगर, सेलाकुई के ई-रिक्शा वर्कर्स भी आज हड़ताल में शामिल हुए।

गांधी पार्क से जिला मुख्यालय तक एक विशाल रैली निकाली गई, जिसमें सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों का जोरदार विरोध किया गया। इसके बाद नगर मजिस्ट्रेट प्रत्यूष कुमार के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा गया।

इस विरोध प्रदर्शन में प्रमुख रूप से कृष्ण गुनियाल, मनमोहन रौतेला, धीरज कुमार, भगवंत पायल, सुरेंद्र सिंह सजवान, गंगाधर नौटियाल, चंपा देवी, दमयंती नेगी, जानकी चौहान, शिवा दुबे और नितिन मलेथा जैसे कई वरिष्ठ कार्यकर्ता शामिल रहे।

इस अवसर पर सफल हड़ताल के लिए मजदूर वर्ग को धन्यवाद दिया

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