mediation on pakistan

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भारत ने एक बार फिर दोहराया है कि वह पाकिस्तान से संबंधित मामलों में किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को न पहले स्वीकार करता था, न अब करता है और न ही भविष्य में करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ एक टेलीफोनिक बातचीत में यह बात स्पष्ट रूप से कही।

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बुधवार को पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत ट्रंप के अनुरोध पर हुई और यह लगभग 35 मिनट तक चली। यह वार्ता उस समय हुई जब जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान होने वाली उनकी आमने-सामने की बैठक राष्ट्रपति ट्रंप की अमेरिका वापसी के कारण रद्द हो गई थी।

मिस्री के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने इस बातचीत का उपयोग 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले और उसके बाद भारत द्वारा की गई सैन्य कार्रवाई की जानकारी देने के लिए किया। हमले में 26 पर्यटकों की मौत हुई थी। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत की सैन्य कार्रवाई केवल आतंकी ठिकानों पर लक्षित थी और यह नपी-तुली, सटीक तथा गैर-उकसावे वाली थी।

विदेश सचिव ने बताया कि मोदी ने ट्रंप को यह भी स्पष्ट किया कि भारत पाकिस्तान की किसी भी आतंकी कार्रवाई को युद्ध की कार्रवाई मानेगा। उन्होंने यह कहा कि “भारत गोली का जवाब गोले से देगा” और यदि पाकिस्तान ने कोई बड़ा जवाबी हमला किया तो भारत उससे भी ज्यादा ताकत से जवाब देगा।

मिस्री ने बताया कि 9 मई की रात अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस ने प्रधानमंत्री मोदी को चेतावनी दी थी कि पाकिस्तान जवाबी हमला कर सकता है। इसके जवाब में भारत ने 9-10 मई की रात जोरदार सैन्य कार्रवाई की, जिसमें पाकिस्तान को भारी नुकसान हुआ और कई एयरबेस निष्क्रिय हो गए। इसके बाद पाकिस्तान ने युद्धविराम का अनुरोध किया, जिस पर भारत केवल सैन्य चैनलों के माध्यम से हुई सीधी बातचीत के बाद सहमत हुआ।

मिस्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इस पूरे प्रकरण में कहीं भी भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता या तीसरे पक्ष की मध्यस्थता पर कोई चर्चा नहीं हुई।

राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत की आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को समर्थन दिया और प्रधानमंत्री मोदी को वाशिंगटन आने का निमंत्रण भी दिया, जिसे मोदी ने पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के कारण अस्वीकार कर दिया। वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप को अगले क्वाड सम्मेलन में भारत आने का न्योता दिया, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया।

बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने ईरान-इज़राइल संघर्ष, रूस-यूक्रेन युद्ध और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर भी चर्चा की। दोनों ने क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए सीधी और रचनात्मक बातचीत की आवश्यकता पर सहमति जताई।

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